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संयुक्त राष्ट्र (United Nations – UN) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) के बाद 24 अक्टूबर 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कि गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना, देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, मानवाधिकारों की रक्षा करना और सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है। इसकी स्थापना उस समय की गई जब दुनिया दो बार (WWI और WWII) विनाशकारी युद्धों से गुज़र चुकी थी। लाखों लोगों की जानें गईं, देशों की अर्थव्यवस्थाएँ तबाह हुईं और वैश्विक स्थिरता खतरे में पड़ गई।
1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना
द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के दौरान मित्र राष्ट्रों (Allied Powers) ने यह महसूस किया कि युद्धों को रोकने और स्थायी शांति बनाए रखने के लिए एक वैश्विक संगठन की आवश्यकता है। इससे पहले लीग ऑफ़ नेशन्स (League of Nations) की स्थापना प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1919 में हुई थी, लेकिन वह अपने उद्देश्य में असफल रही और WWII को रोक नहीं सकी। अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने 1941 में अटलांटिक चार्टर (Atlantic Charter) जारी किया, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके बाद 1945 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में एक सम्मेलन हुआ जिसे San Francisco Conference कहा गया। इसमें 50 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और एक चार्टर (संविधान) पर हस्ताक्षर किए — यही United Nations Charter कहलाया। 24 अक्टूबर 1945 को जब यह चार्टर लागू हुआ, तब संयुक्त राष्ट्र औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया।
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंग
संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंग हैं:
- महासभा (General Assembly) – सभी सदस्य राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच।
- सुरक्षा परिषद (Security Council) – वैश्विक शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी; इसमें 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं।
- आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) – सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर कार्य करता है।
- न्यायिक अंग – अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) – हेग (नीदरलैंड) में स्थित, जो राष्ट्रों के बीच विवादों को सुलझाता है।
- सचिवालय (Secretariat) – प्रशासनिक अंग; महासचिव इसका प्रमुख होता है।
- ट्रस्टीशिप काउंसिल (Trusteeship Council) – उपनिवेशों को स्वतंत्रता दिलाने में मदद के लिए बनाया गया, अब निष्क्रिय है।
शांति स्थापना में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका
1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद UN का प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। इसके लिए संगठन कई तरीकों से कार्य करता है:
1. शांति अभियानों (Peacekeeping Missions)
UN शांति रक्षक बल (Blue Helmets) को उन क्षेत्रों में तैनात करता है जहाँ संघर्ष हुआ हो और स्थिति अस्थिर हो। ये बल संघर्षरत पक्षों के बीच संघर्ष रोकने, नागरिकों की सुरक्षा, चुनाव में सहायता और स्थायित्व लाने के लिए तैनात होते हैं।
उदाहरण:
- कांगो (MONUC, अब MONUSCO)
- सूडान-दक्षिण सूडान
- साइप्रस
- लेबनान
2. संघर्ष रोकथाम और मध्यस्थता
UN विभिन्न देशों के बीच चल रहे तनाव को बढ़ने से पहले रोकने के लिए कूटनीतिक वार्ता और मध्यस्थता की भूमिका निभाता है। यह सैन्य संघर्ष को राजनीतिक समाधान में बदलने का प्रयास करता है।
3. मानवाधिकारों की रक्षा
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के माध्यम से वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की निगरानी करता है और उल्लंघन पर रिपोर्ट जारी करता है। यह शांति की स्थापना के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि मानवाधिकार हनन कई बार संघर्ष का कारण बनता है।
4. आर्थिक और मानवीय सहायता
युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में UN की एजेंसियाँ जैसे UNDP, UNICEF, WHO, UNHCR, WFP आदि सहायता पहुँचाती हैं। ये कार्य शांति बहाली में सहयोग करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियाँ
- कोरिया, नामीबिया, पूर्व युगोस्लाविया, पूर्वी तिमोरआदि में शांति स्थापना में सफलता।
- ओस्लो समझौता (1993) – इज़राइल और फिलीस्तीन के बीच बातचीत में भूमिका।
- ईबोला महामारी और कोविड-19 जैसी वैश्विक स्वास्थ्य संकटों में WHO के माध्यम से योगदान।
- परमाणु हथियारों की रोकथाम के लिए IAEA और NPT समझौते को लागू कराना।
चुनौतियाँ
हालाँकि UN ने कई क्षेत्रों में सराहनीय कार्य किया है, फिर भी इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य देशों का वीटो अधिकार निर्णयों में बाधा डाल सकता है।
बड़े देशों के राजनीतिक हित अक्सर निर्णयों को प्रभावित करते हैं। संसाधनों की कमी और धीमी प्रक्रिया कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
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निष्कर्ष
1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का गठन मानवता के लिए एक ऐतिहासिक कदम था। यह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि विश्व शांति, सह-अस्तित्व और सहयोग का प्रतीक है। यद्यपि इसकी सीमाएँ हैं, फिर भी आज भी UN वैश्विक संकटों में समाधान का प्रमुख मंच बना हुआ है। यदि इसमें सुधार और अधिक निष्पक्षता लाई जाए, तो यह आने वाले समय में भी मानवता के कल्याण का एक मजबूत स्तंभ बना रहेगा।
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