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भारत अपनी विविधता, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन यदि बात स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की हो, तो मेघालय के छोटे से गाँव मावलिननॉन्ग (Mawlynnong) का नाम सबसे पहले आता है। मावलिननॉन्ग गाँव न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया में “सबसे साफ-सुथरे गाँव” के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ की स्वच्छता, सामुदायिक अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण की परंपरा आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है।
मावलिननॉन्ग गाँव कहाँ स्थित है?

मावलिननॉन्ग गाँव मेघालय राज्य के ईस्ट खासी हिल्स जिले में स्थित है। यह गांव शिलांग से लगभग 97 किलोमीटर दूर है। हरियाली से घिरा यह गाँव घने जंगलों, झरनों और पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है। प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छता का ऐसा अद्भुत मेल शायद ही कहीं और देखने को मिले। इसे अक्सर “God’s Own Garden” भी कहा जाता है।
स्वच्छता की परंपरा
मावलिननॉन्ग गाँव की खासियत यह है कि यहाँ स्वच्छता कोई सरकारी योजना या अभियान का नतीजा नहीं है, बल्कि यह उस गांव में रहने वाले ग्रामीणों की जीवनशैली और परंपरा का हिस्सा है। गाँव का हर व्यक्ति, चाहे वह बच्चा हो या बुजुर्ग, साफ-सफाई को अपनी जिम्मेदारी मानता है।
- हर घर के बाहर बांस के डस्टबिन लगे हुए हैं।
- कचरे को जैविक और अजैविक श्रेणियों में बांटा जाता है।
- जैविक कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाई जाती है।
- गाँव में सामूहिक सफाई नियमित रूप से की जाती है।
यही कारण है कि गाँव की गलियाँ हमेशा साफ-सुथरी और हरियाली से भरी हुई दिखाई देती हैं।
महत्वपूर्ण पहल और नियम
मावलिननॉन्ग गाँव में कुछ ऐसे नियम हैं, जो इसकी पहचान बन गए हैं:
- प्लास्टिक प्रतिबंध – गाँव में प्लास्टिक बैग का पूरी तरह से उपयोग बंद है।
- धूम्रपान निषेध – धूम्रपान यहाँ सख्त वर्जित है। नियम तोड़ने पर जुर्माना भी लगाया जाता है।
- 100% शौचालय सुविधा – वर्ष 2007 से गाँव के हर घर में शौचालय है, जिससे खुले में शौच पूरी तरह बंद हो गया है।
- शिक्षा और जागरूकता – गाँव में लगभग 100% साक्षरता है। बच्चों को भी छोटी उम्र से ही स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का महत्व सिखाया जाता है।
पर्यटन के आकर्षण

मावलिननॉन्ग गाँव केवल स्वच्छता के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहाँ पर्यटकों के लिए कई आकर्षण भी हैं।
- लिविंग रूट ब्रिज – रबर के पेड़ों की जड़ों से बना यह प्राकृतिक पुल अनोखा और अद्भुत है।
- स्काई व्यू टॉवर – बाँस से बने इस टॉवर पर चढ़कर बांग्लादेश के मैदानी इलाकों का दृश्य देखा जा सकता है।
- बैलेंसिंग रॉक्स – एक बड़ी चट्टान दूसरी पत्थर पर संतुलित है, जिसे लोग प्राकृतिक चमत्कार मानते हैं।
- झरने और हरी-भरी घाटियाँ – गाँव के आसपास कई झरने और खूबसूरत घाटियाँ हैं, जहाँ प्रकृति का आनंद लिया जा सकता है।
पर्यटक गाँव में होमस्टे की सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं, जिससे वे स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को नजदीक से जान पाते हैं।
सामुदायिक भागीदारी का अद्भुत उदाहरण
मावलिननॉन्ग गाँव की सबसे बड़ी ताकत है समुदाय की एकजुटता। यहाँ हर ग्रामीण यह मानता है कि गाँव की स्वच्छता उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। शादी, त्योहार या किसी भी आयोजन के दौरान भी सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।
महिलाएँ और पुरुष मिलकर कचरा प्रबंधन करते हैं, बच्चे बड़ों के साथ सफाई में हाथ बंटाते हैं, और बुजुर्ग नियमों का पालन करवाने में मदद करते हैं। यह सामूहिक प्रयास ही इस गाँव को भारत के बाकी राज्यों से इतना खास बनाता है।
पुरस्कार और मान्यता
- वर्ष 2003 में Discover India पत्रिका ने मावलिननॉन्ग को “एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव” घोषित किया।
- इसके बाद से यह गाँव दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया और हर साल हजारों पर्यटक यहाँ आने लगे।
- भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इस गाँव की स्वच्छता प्रणाली की सराहना की है।
अन्य गाँवों के लिए प्रेरणा
मावलिननॉन्ग गाँव यह साबित करता है कि यदि समुदाय एकजुट होकर काम करे, तो सीमित संसाधनों के बावजूद
किसी भी गाँव या शहर को स्वच्छ और आकर्षक बनाया जा सकता है। यहाँ का उदाहरण हमें यह सिखाता है कि:
- स्वच्छता केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं, बल्कि यह जनसह भागिता से ही टिकाऊ बन सकती है।
- प्लास्टिक से बचाव, कम्पोस्टिंग और पर्यावरणीय जागरूकता जैसे छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं।
- बच्चों को बचपन से ही साफ-सफाई की आदत डालना दीर्घकालीन समाधान है।
निष्कर्ष
मावलिननॉन्ग गाँव सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक शक्ति का जीवंत उदाहरण है। यहाँ की स्वच्छता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण की भावना न केवल देश बल्कि पूरे विश्व को प्रेरित करती है।
जब हम ‘स्वच्छ भारत’ की बात करते हैं, तो मावलिननॉन्ग इसका जीता-जागता उदाहरण है कि सही सोच और सामुदायिक भागीदारी से हर कोना साफ-सुथरा और आकर्षक बनाया जा सकता है।
इसलिए कहा जाता है — मावलिननॉन्ग सिर्फ एक गाँव नहीं, बल्कि स्वच्छता की मिसाल है।
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