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तुवालु (Tuvalu) प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में स्थित एक छोटा-सा द्वीपसमूह देश है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति, सीमित संसाधनों और जलवायु परिवर्तन से जूझने की वजह से पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित करता है। यह दुनिया के सबसे छोटे और कम आबादी वाले देशों में से एक है। कभी इसे “एलिस द्वीपसमूह” (Ellice Islands) के नाम से जाना जाता था। तुवालु शब्द का अर्थ है – “आठ खड़े हुए द्वीप”, जबकि वास्तव में यह नौ द्वीपों का समूह है।
भौगोलिक स्थिति
तुवालु भूमध्य रेखा के पास, हवाई और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्थित है।
- कुल क्षेत्रफल : केवल 26 वर्ग किलोमीटर
- द्वीपों की संख्या : 9 छोटे द्वीप (जिनमें से कुछ एटोल और कुछ प्रवाल द्वीप हैं)
- सबसे बड़ा द्वीप : फुनाफूती (Funafuti), जहाँ देश
की राजधानी और अधिकांश जनसंख्या बसी हुई है।
ये द्वीप समुद्र तल से केवल 2–3 मीटर ऊँचे हैं, इस कारण यह देश जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण सबसे अधिक खतरे में है।
जनसंख्या और भाषा
2024 के अनुमान अनुसार इस देश की आबादी लगभग 11 हज़ार है, जिससे यह विश्व के सबसे कम आबादी वाले देशों में शामिल है।
- प्रमुख भाषा : तुवालुअन (Tuvaluan) और अंग्रेज़ी
- धर्म : अधिकांश लोग ईसाई (Christian) हैं।
- समाज : लोग सामुदायिक जीवन जीते हैं, पारंपरिक रीति-रिवाज़ और सांस्कृतिक मूल्य यहाँ अब भी बहुत मज़बूत हैं।
इतिहास
- प्राचीन समय में ये द्वीप पोलिनेशियन लोगों द्वारा बसाए गए थे।
- 16वीं शताब्दी में यूरोपीय नाविकों ने इन द्वीपों को खोजा।
- 1892 में ब्रिटिश साम्राज्य ने इस देश को अपने अधीन कर लिया और इसे एलिस द्वीपसमूह कहा।
- 1978 में तुवालु ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त की और राष्ट्रमंडल (Commonwealth) का सदस्य बना।
राजनीति और प्रशासन
तुवालु एक संसदीय लोकतंत्र (Parliamentary Democracy) है।
- राष्ट्राध्यक्ष : ब्रिटेन का सम्राट (किंग चार्ल्स III) – गवर्नर जनरल के माध्यम से प्रतिनिधित्व।
- सरकार : प्रधानमंत्री और संसद द्वारा चुनी जाती है।
- राजधानी : फुनाफूती (Funafuti)
अर्थव्यवस्था
तुवालु की अर्थव्यवस्था बहुत सीमित है क्योंकि यहाँ प्राकृतिक संसाधनों की कमी है।
मुख्य आय स्रोत:
- मछली पकड़ना और समुद्री उत्पाद
- कृषि – नारियल, पपीता और केला
- विदेशों से आने वाला धन – बहुत से तुवालुवासी न्यूजीलैंड और फिजी में काम करते हैं।
- (.tv ) इंटरनेट डोमेन की बिक्री – तुवालु का इंटरनेट डोमेन (.tv) दुनियाभर के टीवी चैनलों और स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म्स द्वारा उपयोग किया जाता है, जिससे सरकार को अच्छी आय होती है।
- अंतरराष्ट्रीय सहायता – ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अन्य देशों से आर्थिक मदद।
संस्कृति और परंपराएँ
तुवालु की संस्कृति पोलिनेशियन परंपरा से प्रभावित है।
- नृत्य और संगीत : पारंपरिक नृत्य “फातेले (Fatele)” सबसे लोकप्रिय है।
- हस्तकला : नारियल के पत्तों और शंखों से वस्त्र और सजावटी सामान बनाए जाते हैं।
- भोजन : मुख्य भोजन में नारियल, मछली और समुद्री घास का उपयोग होता है।
- सामूहिकता और सामाजिक एकता यहाँ के जीवन का मूल हिस्सा है।
जलवायु और पर्यावरणीय चुनौतियाँ
तुवालु को “डूबता हुआ देश” कहा जाता है।
- औसतन समुद्र तल से केवल 2 मीटर ऊँचा होने के कारण, यदि समुद्र का स्तर बढ़ता रहा तो आने वाले दशकों में तुवालु पूरी तरह जलमग्न हो सकता है।
- बढ़ती जलवायु आपदाएँ जैसे चक्रवात, तटीय कटाव और बाढ़ यहाँ की आबादी के लिए बड़ी समस्या हैं।
- पेयजल की कमी भी एक गंभीर मुद्दा है।
संयुक्त राष्ट्र में तुवालु लगातार यह आवाज़ उठाता है कि विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय महत्व
भले ही तुवालु आकार में बहुत छोटा है, लेकिन इसका महत्व कई कारणों से है:
- जलवायु परिवर्तन का प्रतीक – यह देश दुनिया को दिखाता है कि समुद्र के बढ़ते स्तर से छोटे द्वीप राष्ट्रों का अस्तित्व खतरे में है।
- रणनीतिक स्थिति – प्रशांत महासागर में स्थित होने के कारण बड़े देशों की नज़र यहाँ पर रहती है।
- डिजिटल पहचान (.tv डोमेन) – पूरी दुनिया में लोकप्रिय, जिससे तुवालु को विशेष पहचान मिली है।
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निष्कर्ष
तुवालु भले ही क्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से बहुत छोटा है, लेकिन इसका महत्व वैश्विक स्तर पर बहुत बड़ा है। इसकी सांस्कृतिक परंपराएँ, सामुदायिक जीवन और सरल जीवनशैली एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन और समुद्र स्तर में वृद्धि इसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है। आने वाले वर्षों में तुवालु मानवता के सामने एक अहम प्रश्न खड़ा करता है – क्या दुनिया छोटे राष्ट्रों को बचाने के लिए एकजुट होगी या केवल उन्हें इतिहास का हिस्सा बनने देगी?
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1 thought on “तुवालु द्वीपसमूह: प्रशांत महासागर का छोटा सा देश और उसकी जलवायु चुनौतियाँ”